अज़ीब सी जिंदगी हो गई…

अज़ीब सी जिंदगी हो गई है।
ख़ुशी जाने कहा खो गई है।
अपनों के पीछे भागते भागते।
सपने भी नहीं आते।
आते हुए सपने क्यों दर्द दे के जाते हैं।
काश ऐसी हो जाए जिंदगी।
कोई पास आ के इतना तो कहे।
की हम टूटे हुए सपने जोड़ते है।
सुना आप का सपना टूट गया।
क्यों न मैं आपने अच्छे सपने आपको दे दू।
आप भी उनके जेसे ही हो जाओ।
खुद को खोने ने अच्छा है।
आप किसी के प्यार में खो जाओ।

बच्चे?

बिना अश्रुओं से रोना कितना तकलीफ देता है।
अच्छा होता आज भी हम बच्चे होते ।
रोने का सबब तो कोई न पूछता।
और लोग कहते बच्चा ही तो है।
जिद्द कर बैठा होगा।

khamoshiya

गुफ्तगू के ख़त्म हो जाने पर आया ये ख़याल
जो जबां तक आ नहीं पाया वही तो दिल में था??

बातों में बहुत बात होती हैं।
पर वो बात नहीं होती।
जो मेरे ख्यालात में होती है।

बहुत करीब हो के भी भी वो बहुत दूर है।
अदब से कह दो दिल को।
की काबू में रहे।
वरना चकनाचूर होते देर नहीं लगेगी।

हम वो नहीं जो हालात से बदल जाए।
हवा की तरह बह जाए।
आज़माने का दौर आये तो।
आज़मा लेना।
हम वो नहीं जो इश्क की राह से मुड़ जाये।

लोग कहते है दिल बदल जाता है।
वो क्या करे ।
जिसके सीने में दिल नहीं।

वो दिन भी क्या दिन होगा।
जब लोग हमें सुकून से सोता देखेंगे।
और बोलेगे बहुत जागी है।
अब चैन से सो लेने दो।

एक दिन तुम बहुत याद करोगे।।
वो दिन भी क्या दिन होगा।
आप जागोगे।
और हम सोते रहेंगे।

जिंदगी

मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नही……
मैं वो किताब हूँ जिसमें शब्दों की जगह जज्बात लिखे है…..

इश्क

देखते है अब क्या मुकाम आता हैं साहेब।
सुखी पत्ती को इश्क हुआ है बहती हवा से।

इम्तहान

न तुम हमें समझ पाये।
न हम तुम्हे समझ पाये।
चलो अच्छा हुआ।
ये इम्तहानो का दौर खत्म हुआ।

always lonely

न मेरे सुख में कोई।
न मेरे दुःख में कोई।
न मेरे साथ कोई।
न मेरे राह में कोई।
अकेले ही चल दी।
जिंदगी तमाम हो गई।