राखी

हर साल अगस्त में जब राखी आती है
तो बचपन की बातें याद दिलाती है
कितना अटूट है भाई बहन का रिश्ता
राखी फिर वोही रिश्ता बनाती है

रौली,मौली, कुमकुम और मिठाई
थाली में लेकर बहने आती थीं
बाँध कर राखी भैया के हाथ
ख़ुशी से फूली नहीं समाती थीं

हाथ पे बंधवा राखी का धागा
लेता है भाई बहनों से ये वादा
मेरी बहना, कभी भूल न जाना
राखी का तुम वचन निभाना

हैं बहनें बहुत ही सब को प्यारी
बचपन से होती हैं राज दुलारी
ऐसे ही बनी रहे यह प्रीत हमारी
प्रभु से है बस यही दुआ हमारी

किस्मत कभी कभी पलटा खाती है
बहन भाईओं से दूर हो जाती है
कितनी भो दूर हो जाए बहन
वो फिर भी अपना वादा निभाती है

दूर हो कर भी बहनें कभी भूलती नहीं
हर साल की तरह नहीं चूकती नहीं
डाक में हमेशा ही भेजती रहती हैं
किसी कारण अगर आ सकती नहीं

भाई को भी यह होता है अहसास
दूर रहते हुए भी हैं बहनें कितनी पास
भाई बहन का यह रिश्ता’ तिलक’
इस दुनिया में है सबसे ख़ास

खुदा करे बना रहे ऐसा ही रिश्ता
हर बहन को रहे भाई मिलता
शारीरिक दूरी भले ही हो जाए
सदा रहे प्यार दिलों में पलता